जा छोड़ दे
जा छोड़ दे के अब जीने दे मुझे
ग़म हो तो हो के अब पीने दे मुझे
होगी प्यास दर्द की मुझे जो अब कभी
समंदर है ना आँसू का के पीने दे अब मुझे
तन्हाई की मुझे अब कोई फ़िक़्र नहीं होती
के मेहफ़िलें तेरी यादों की सजती रोज़ हैं होती
डरता हूं मेरे बिन क्या तू अब चैन पाएगा
ज़माना था के मेरे बिन सुबहें तेरी नहीं होती
चलेगी साँसे तो मेरी धड़कने दिल में होंगी
के चलना भर ही साँसों का कोई ज़िंदगी नहीं होती
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