कुछ यूं जकड़ा हुआ हूं परेशानियों मेंकि उसके रुख पे मुस्कान भी दिखाई नहीं देतीकुछ यूं घिरा है दिल मेरा ग़म के बादलों सेदूर वो रोशनी की किरण भी दिखाई नहीं देती
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