Friday, September 13, 2024
Thursday, September 12, 2024
निगेहबां
शुक्रगुजार हूं मैं , इनायत है तू
साँसें हैं तू, ज़िंदगी है तू
भरी बरसात में जो दिखाई दे
वो रोशनी की किरण है तू
तेरे होने से मैं हूं मेरे होने की वजह है तू
रख दे सर पे हाथ मेरे एक बार
हो मुझे यकीं के निगेहबां है तू
जा छोड़ दे
जा छोड़ दे के अब जीने दे मुझे
ग़म हो तो हो के अब पीने दे मुझे
होगी प्यास दर्द की मुझे जो अब कभी
समंदर है ना आँसू का के पीने दे अब मुझे
तन्हाई की मुझे अब कोई फ़िक़्र नहीं होती
के मेहफ़िलें तेरी यादों की सजती रोज़ हैं होती
डरता हूं मेरे बिन क्या तू अब चैन पाएगा
ज़माना था के मेरे बिन सुबहें तेरी नहीं होती
चलेगी साँसे तो मेरी धड़कने दिल में होंगी
के चलना भर ही साँसों का कोई ज़िंदगी नहीं होती
सपने तेरे मेरे
और तेरे सपनों के जहां में
मेरा सपनों का जहां है
वहीं पे हमारा सपनों का जहां है
जहां तेरे सपनों को में देखता हूं
और मेरे सपनों को तू
और इन सपनों के जहां की खिड़की से
झांक कर देखने पर दिखाई देता है
दूर वो हकीकत का जहां
जहां हम दूर होकर भी बहुत क़रीब हैं
और क़रीब होकर भी बहुत दूर

