कब तक मेरे संग चलोगे तुम को ही तय करना है
मेरे ग़मो के समंदर में डूबना है या तरना है ।।
मेरी मंजिल पास नहीं है दूर बहुत ही जाना है
संग चलने का फल मीठा है ये तो सबने जाना है ।।
पहुँच मंजिल पर देखूंगा क्या खोया क्या पाया है
संग हुए तो, गीत मधुर है वर्ना ग़म का तराना है ।।