ये क्या मंज़र दिखाता है
खुदा मेरा मुझको
जुदा हो गई जान मेरी
और उसपे सितम ये
के फरमाया गया
अपना ख़्याल रखना
तेरी राह में सफ़र है मेरा
मेरी राह में सफ़र है तेरा
और कुछ यूँ मैं तेरा
तू हमसफ़र है मेरा
क्या हुआ जो मैं कहीं और
तू कहीं और चल रहा
मैं भी चलूँ
तू भी चल
कहीं किसी मोड़ पे
मिलेंगे ज़रूर
यकीं है मेरा ||