Monday, January 31, 2011

अफरातफरी

हर तरफ भागमभाग है, अफरातफरी है मारामारी है,
दूसरे को धकेल कर, आगे बढ़ने की होड़ पुरजोर जारी है |

बगल से कौन गुजरा, पीछे कौन छूटा ये देखना का वक्त नहीं है
तुम्हारी क्या बात करूँ, मेरे पास खुद मेरे लिए वक्त नहीं है |

हर तरफ भीड़ ही भीड़ है हर तरफ चेहरे ही चेहरे है
शोरगुल सुनाई नहीं देता, आवाज़ पर सन्नाटों के पहरे है |

रुक कर कोयल की कुहुकुहू सुन लें,  किसी मुस्कान का जवाब मुस्करा के दें,
दुश्वार नहीं है... आओ इन बातों के लिए जिंदगी से दो पल चुरा लें .....|

वक्त न रुका है न रुकेगा किसी के लिए, हर पल को, हर लम्हे को जी लें
मैं और तुम मुस्करा के मिलें, साथ में इन हसीं लम्हों को जी लें |

मैं भीड़ में एक चेहरा न रहूँ, तुम एक पहचान बन जाओ
जिन्दगी एक गीत है, मैं भी गाऊं तुम भी गुनगुनाओ |


Friday, January 28, 2011

फितरत


फितरत इन्सान की है खुदगर्जी की
हर समय चाहता है जिन्दगी अपनी मर्जी की
मैं, मेरा,  मेरा, करते करते जिंदगी पूरी गुजर जाती है 
कौन मिला, किसने दिया अपना हाथ और आगे बढ़ाया, 
पीछे कौन छूटा, किसके ऊपर चढ़ कर बढ़े है आगे,
जिंदगी की इस आपाधापी में किस के साथ कितनी दूर भागे,
आखरी सांस से पहले अगर हो इल्म इस बात का,
तो जिंदगी पूरी है वर्ना अधूरी ही गुजर जाती है .......

Thursday, January 27, 2011

ख़ुशी

ख़ुशी क्या है ?????

कुछ दिनों पहले मेरे डिपार्टमेंट की ऑफिसर्स मीट में  ये सवाल उठा था की ख़ुशी क्या है?? क्या इसे नापा जा सकता है ???  या फिर दो व्यक्तियों की ख़ुशी की तुलना की जा सकती है ???

ये सवाल इतने जटिल और भरी भरकम हैं की इनका जवाब थोडासा कठिन है और शायद हर व्यक्ति इसका जवाब अलग अलग और अलग अलग शब्दों में देगा |

पहले  सवाल के जवाब में अलग अलग प्रतिक्रिया मिलेगी किसी के पास एक बड़ा बंगला जिसके बाहर गुरखा हो जो की जब बड़ी सी गाडी में साहब आए तो सलाम ठोके,  अलग अलग बैंको के खाते हों और उन खातों में ढेर सारा पैसा हो, उस पैसे से वह टीवी, फ्रिज, ऐ सी इत्यादि खरीद सके यानि कि जीवन में हर तरह की सुविधा हो तो वह उन सुविधाओं को ख़ुशी कहेगा  |

उसके विपरीत यदि किसी को दोनों वक्त खाने को मिल जाये, चाहे खाने के लिए सूखी रोटियों पर चटनी ही क्यों न हो तो वह बहुत खुश होगा |

इस सन्दर्भ में एक कहानी याद आ रही हे जो पाउलो कोएलो के ब्लॉग पर पढ़ी थी -
एक व्यापारी ने अपने पुत्र को प्रसन्नता का रहस्य जानने के लिए एक बुद्धिमान वृद्ध के पास भेजा. चालीस दिन और चालीस रातों तक रेगिस्तान में चलता हुआ वह युवक अंततः एक पर्वत के शिखर पर बने हुए सुन्दर किले के पास पहुँच गया. वह बुद्दिमान वृद्ध वहीं रहता था.
उस किले में प्रवेश करने पर उसने देखा कि वहां मजमा-सा लगा हुआ था. चारों ओर राग-रंग बिखरा हुआ था. व्यापारियों की टोलियाँ घूम रहीं थीं. यहाँ-वहां बैठे लोग बतिया रहे थे. साजिंदों ने रागिनियाँ छेड़ रखीं थीं. दस्तरखानों पर दुनिया के बेहतरीन पकवान सजे हुए थे.
युवक ने भीड़ में बुद्धिमान वृद्ध को भी देखा. वह कई लोगों से बातें कर रहा था. सभी उससे कुछ पूछना कहते थे. अपनी बारी आने के लिए युवक को दो घंटे तक इंतज़ार करना पड़ा.
वृद्ध ने बहुत धैर्यपूर्वक युवक से उसके वहां आने का कारण सुना. वृद्ध ने उससे कहा कि प्रसन्नता का रहस्य बताने के लिए उसके पास पर्याप्त समय नहीं है. उसने युवक से कहा कि वह एक-दो घंटे में किले के इर्द-गिर्द सैर करके वापस आ जाये.
“जाने से पहले मेरे लिए एक छोटा सा काम कर दो” - वृद्ध वे युवक से कहा. वृद्ध ने युवक को एक चम्मच में दो बूँद तेल डालकर दे दिया और कहा – “बाहर घूमते-फिरते समय इस चम्मच को अपने हाथ में रखे रहना और इसमें से तेल की बूँदें गिरने मत देना.”
युवक ने उस चम्मच को बहुत सावधानी से अपने हाथ में थामकर किले की बेशुमार सीढ़ियाँ चढीं-उतरीं और दसियों कमरों में से गुज़रा. उसकी नज़रें हमेशा चम्मच में मौजूद तेल पर ही टिकीं रहीं. दो घंटे के बाद वह वृद्ध के पास लौट आया.
“बढ़िया है” - वृद्ध ने युवक से कहा – “क्या तुमने हमारे भोजन कक्ष में टंगे बेशकीमती फ़ारसी परदे देखे? तुमने वह बाग़ तो देखे ही होंगे जिन्हें तराशने में हमारे सबसे हुनरमंद मालियों को भी दस साल लग गए! और तुमने किताबघर में रखीं नायाब किताबें देखीं?”
युवक ने झिझकते हुए कहा कि उसने वह सब नहीं देखा. उसके जहन में हर पल वृद्ध द्वारा सौंपी गईं तेल की बूंदों को गिरने से बचने की कवायद ही चल रही थी.
“कोई बात नहीं. तुम दोबारा जाओ और यह सब अच्छे से देखकर वापस आओ.” - वृद्ध ने युवक से कहा – “तुम उस आदमी पर तब तक यकीन नहीं कर सकते जब तक तुमने उसके घर को भली-भांति न देख लिया हो”.
इस बार युवक के मन में कोई परेशानी नहीं थी. उसी चम्मच को हाथ में थामे हुए युवक ने आराम से किले को देखा. इस बार उसने वृद्ध द्वारा बताई गईं खासियतों के साथ -साथ किले में मौजूद बेशुमार कलाकृतियों और बारीकियों का मुआयना किया. वापस लौटकर उसने वृद्ध को सब कुछ तफ़सील से बताया.
“ठीक है. लेकिन वह दो बूँद तेल कहाँ है जो मैंने तुम्हें हिफाज़त से रखने के लिए दिया था?” – वृद्ध ने पूछा.
उस चम्मच को देखने पर युवक को इस बात का इल्म हुआ कि चम्मच में से सारा तेल छलक चुका था.
“मायूस न हो मेरे बच्चे. मैं तुम्हें यही तो दिखाना चाहता था” – वृद्ध ने कहा – “प्रसन्नता का रहस्य इसी बात में है कि तुम इस दुनिया के सारे करिश्मे देख लो फिर भी तेल की उन दो बूंदों को चम्मच में से न छलकने दो.”

कहानी का सार यही है कि हम अपनी अपनी ख़ुशी को ढूंढे और उसे जी लें .

आज ही एक मेसेज पढ़ा -
"लोग खुश क्यों नहीं है ?????? 
क्योंकि वो ये ढूँढने में व्यस्त हैं कि दूसरे सब लोग  खुश क्यों हैं ?"

मुझे प्रेम है

मुझे प्रेम है तेरी आँखों से, जो चमक जाती हैं मुझे देख कर,
मुझे प्रेम है तेरे लबो से, जो मुस्करा देते हैं मेरी मुस्कराहट पर,
मुझे प्रेम है तेरी जुल्फों से, जो लहरा जाती हैं मेरे आगमन पर,
मुझे प्रेम है तेरे बदन की खुशबू से, जो महकती है मेरी नजदीकियों से,

तेरा प्रेम  रहेगा सदा  के  लिए ,
मेरी आँखों में तेरी  चमक बन कर,
मेरे लबों  पर  तेरी मुस्कराहट बन कर ,
मेरे बदन पर तेरी खुशबू  बन कर,
मेरी  यादों में    मेरे  आखरी  ख्याल तक .....

 



 

  

Thursday, January 13, 2011

Try & Try till you succeed

  अक्सर हम बड़े उत्साह और उल्लास से कोई भी काम शुरू तो कर देते हैं परन्तु थोड़ी सी भी कठिनाई आने पर हिम्मत हारने लगते है और निराशा के सागर में डूब  जाते हैं | तब ओरिजिनल बिग बी यानि की हरिवंश राय बच्चन साहब की यह कविता को पढ़ कर अनुसरण करें तो आगे बदने की प्रेरणा मिलती है और कठिन से कठिन  कार्य भी पूरे हो जाते हैं |

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।


मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।


डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।


असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।