कैसे भागू अतीत से वही तो मेरा आधार है,
आज को कल से जोड़ता वही तो सूत्रधार है |
"घड़ा" गया था कल जिसे वही तो प्यास बुझाता है,
तपा था कल जो आग में वही तो जगमगाता है,
युग युगांतर से अविरत झेल रहा तूफ़ान हूं,
मैं हिमालय हूं, न साधारण कोई पहाड़ हूं |
कैसे भागू अतीत से वही तो मेरा आधार है,
आज को कल से जोड़ता वही तो सूत्रधार है |
आज को कल से जोड़ता वही तो सूत्रधार है |
"घड़ा" गया था कल जिसे वही तो प्यास बुझाता है,
तपा था कल जो आग में वही तो जगमगाता है,
युग युगांतर से अविरत झेल रहा तूफ़ान हूं,
मैं हिमालय हूं, न साधारण कोई पहाड़ हूं |
कैसे भागू अतीत से वही तो मेरा आधार है,
आज को कल से जोड़ता वही तो सूत्रधार है |
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