Wednesday, February 2, 2011

अतीत

कैसे भागू अतीत से वही तो मेरा आधार है,
आज को कल से जोड़ता वही तो सूत्रधार है |

"घड़ा" गया था कल जिसे वही तो प्यास बुझाता है,
तपा था कल जो आग में वही तो जगमगाता  है,
युग युगांतर से अविरत झेल रहा तूफ़ान हूं,
मैं हिमालय हूं, न साधारण कोई पहाड़ हूं |  

कैसे भागू अतीत से वही तो मेरा आधार है,
आज को कल से जोड़ता वही तो सूत्रधार है |

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