अक्सर हम शिकायत करते हैं कि आजकल के गाने पुराने गानों के मुकाबले कुछ भी नहीं हैं, जो बात पुराने गानों में होती थी वो अब नहीं होती, परन्तु ऐसा पूरी तरह सच नहीं है | आज भी अच्छे गाने आते हैं उसका एक उदाहरण है एक नयी फिल्म "टर्निंग ३०" का गाना "सपने" जो न केवल सुनने में अच्छा है बल्कि गाने के बोल भी बढ़िया है..
सपने, खिले हुए रंगों से, उड़े हुए पतंगों से
अम्बर से हैं ऊँचे
टुकड़े, बुझे हुए सूरज के, अभी अभी है चमके,
रोशन है उम्मीदें,
दी सुबह ने आहटें
सारे अरमान नींदों से जागे हैं
अब तो पीछे कुछ नहीं
जिन्हें मिलना है मंज़र वो आगे हैं
पा रा पा रा रा रा रा ..
खुद को ढूंढे यहाँ दूसरों में
सपने, खिले हुए रंगों से, उड़े हुए पतंगों से
अम्बर से हैं ऊँचे
टुकड़े, बुझे हुए सूरज के, अभी अभी है चमके,
रोशन है उम्मीदें,
दी सुबह ने आहटें
सारे अरमान नींदों से जागे हैं
अब तो पीछे कुछ नहीं
जिन्हें मिलना है मंज़र वो आगे हैं
पा रा पा रा रा रा रा ..
खुद को ढूंढे यहाँ दूसरों में
वक्त बनके लहर बह गया
जाते जाते मगर कह गया
जिसे ढूँढ़ते हैं वो, ख़ुशी अपने ही अन्दर रहती है
है खुद में जहाँ तेरा
जिंदगी भी हमसे ये कहती है
पा रा पा रा रा रा रा ..
अब तो चेहरा नया मंजिलों का
अब सफ़र है नया सिलसिलों का
हमसफ़र बनके ये होंसला
नयी दिशा में कहीं ले चला
मिला है जो रास्ता
इन कदमों में चलने कि ख्वाइश है
जिन्हें देखा दूर से
उन लम्हों को छूने की चाहत है
पा रा पा रा रा रा रा ..
सपने, खिले हुए रंगों से, उड़े हुए पतंगों से
अम्बर से हैं ऊँचे
टुकड़े, बुझे हुए सूरज के, अभी अभी है चमके,
रोशन है उम्मीदें,
दी सुबह ने आहटें
सारे अरमान नींदों से जागे हैं
अब तो पीछे कुछ नहीं
जिन्हें मिलना है मंज़र वो आगे हैं
पा रा पा रा रा रा रा ..
achcha gana hai....
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