कुछ यूं गुजरा आज का दिन,
ना तुम्हें देखा ना विसाल हुआ
अब क्या कहूँ.. जाने दो,
साँसे चल रही है अब तक
ना मरना हुआ ना जीना हुआ |
ना तुझे आना था ना तेरा आना हुआ
मेरा अकेलापन ही मेरा हुआ
अब यही अकेलापन रहेगा मेरा
मेरी साँसे चल रही है जब तक
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