Sunday, February 4, 2024

 

कुछ यूं गुजरा आज का दिन,

ना तुम्हें देखा ना विसाल हुआ

अब क्या कहूँ.. जाने दो,

साँसे चल रही है अब तक

ना मरना हुआ ना जीना हुआ |


ना तुझे आना था ना तेरा आना हुआ

मेरा अकेलापन ही मेरा हुआ 

अब यही अकेलापन रहेगा मेरा 

मेरी साँसे चल रही है जब तक  


No comments:

Post a Comment