Monday, February 12, 2024

 

रूठी हो तो भी चुप ना रहो

मन में जो है मुझ से कहो

अच्छा या बुरा सब बोल दो

मन की गिरह को खोल दो

तुम ना बोलोगी तो भी

मैं सुन लूंगा तेरे मन की बात

दूर रहा मैं तुझ से हुई ना मन की बात

कहना मैं भी चाहूँ ढेरों मेरे मन की

तू तो जाने सजनी सब बातें

तेरे मेरे मन की

छोडो ये गुस्सा मान भी जाओ

दे दो मुझको माफ़ी और प्यार से मुस्कुराओ

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