Monday, February 26, 2024

नज़रों को मिलाकर हमने गुफ्तगू कर ली
 

रहे खामोश लब और बात कर ली
 

उसके  गिले मैेनें पढे मेरे  शिकवे उसने पढे

अधरों से अधर  मिलाकर दिलों की बात सुन ली
 

भूल कर सब गिले शिकवे कुछ हमने यूँ सुलह कर ली

No comments:

Post a Comment