Friday, March 1, 2024

 जाओ शौक़ से जी लो जिंदगी मेरे बिना

पर कितनी दूर चल पाओगे मेरे बिना ?

करो याद के कहा था तुमने एक दिन

ये रहगुज़र नामुमकिन होगी मेरे बिना

अब के जबकि निकल ही पड़े हो मेरे बिना

क्या पहुँच भी पाओगे मंजिल तक मेरे बिना ?

सफ़र में याद जब आए तुम्हे मेरी

एक आह भरना और बढना आगे मेरे बिना

गर पहुँच भी जाओ मंजिल तक मेरे बिना

मुड़ के देखोगे आँखों में आंसू लिए

आएगा सवाल ज़ेहन में तुम्हारे

क्या लाज़मी था ये सफ़र मेरे बिना?

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