Thoughts
Monday, May 21, 2012
वो जिनके लिए हम खुद को भुलाये बैठे थे
मन ही मन जिन्हें हम अपना बनाये बैठे थे ।
वो सागर था गहरा गहरा, दूर तलक फैला फैला
वो छू कर हमको चला गया, करके थोड़ा भीना भीना ।
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